इटावा। जिले में अवैध मिट्टी खनन का खेल एक बार फिर खुलकर सामने आ रहा है, जहां खनन माफिया अधिकारियों को कागज़ों में गुमराह कर मोटी कमाई का जुगाड़ कर रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, माफियाओं ने एक ईंट भट्टे के नाम पर मिट्टी खनन की परमिशन ली, लेकिन मिट्टी भट्टे तक न पहुँचकर सीधे भरथना क्षेत्र के कई प्लॉटों में डाली जा रही है। यह खेल न केवल अवैध है बल्कि राजस्व विभाग को लाखों रुपये का नुकसान पहुँचा रहा है।रोज सुबह सूरज निकलने से पहले ही मिट्टी निकालने का पूरा नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। ट्रैक्टर एक के बाद एक खेतों से मिट्टी उठाते हैं और देर शाम तक प्लॉटों में भराई का काम चलता रहता है।
इस खेल में निजी कृषि उपयोग वाले ट्रैक्टरों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है, जबकि नियमों के अनुसार कृषि ट्रैक्टरों का वाणिज्यिक खनन में उपयोग प्रतिबंधित है। क्षेत्रीय लोगों ने कई फोटो और वीडियो खनन विभाग तक भेजे हैं, जिनमें ट्रैक्टरों, जेसीबी और प्लॉटों में हो रही मिट्टी भराई के दृश्य स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।खनन अधिकारी से दूरभाष पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि परमिशन ईंट भट्टे के नाम से जारी की गई होगी और वही मिट्टी पहुंचेगी, लेकिन प्लॉटों में मिट्टी की भराई बिल्कुल नहीं की जा सकती ।
अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि ट्रैक्टरों की स्पष्ट तस्वीरें उपलब्ध हैं, तो वाहन और संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा ट्रैक्टर सीज किए जाएंगे।सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिनदहाड़े चल रही अवैध भराई की जानकारी थाना पुलिस को क्यों नहीं होती। इलाके के लोग बताते हैं कि प्लॉटों में जेसीबी से मिट्टी डालने और ट्रैक्टरों की आवाजाही का सिलसिला खुलकर चल रहा है, लेकिन किसी भी स्तर पर रोकथाम नजर नहीं आती। माफिया उपजाऊ भूमि को लगातार नुकसान पहुँचा रहे हैं, जिससे क्षेत्र की कृषि संरचना भी प्रभावित हो रही है।
भरथना थाना क्षेत्र के यादव नगर और नगला पूठ की ओर सोमवार की देर शाम तक बड़े पैमाने पर प्लॉटों में मिट्टी भराई की जा रही थी। पिपरीपुर रोड और असफपुर बंबा रोड की तरफ से लगातार ट्रैक्टर मिट्टी लेकर आते देखे गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कार्रवाई केवल कागजों में रह जाती है, जबकि अवैध खनन का कारोबार बिना रुकावट चलता रहता है।क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि राजस्व की हानि के साथ-साथ इलाके की उपजाऊ भूमि को बर्बाद होने से बचाया जा सके।
